सय्यद अली रज़ा नक़वी रज़ा अमरोही 18 रजोन सन 1939 को अमरोहा के क़दीम ख़ानदान ख़ुशमी में तवल्लुद हुए। इस ख़ानदान के मुरस-ए-आला ख़्वाजा ख़तीर सुल्तान ग़ियासुद्दीन बलबन के अहद में तुर्किस्तान के शहर बख़्शब से जो अब शहर क़रशी कहलाता है हिन्दुस्तान आए और बलबन से लेकर ग़ियासुद्दीन तुग़लक़ तक मुतवात्तर पाँच बादशाहों के वज़ीर रहे। तक़रीबन 25 साल ममलिकत …..
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रज़ा अमरोहवी की किताबें
तारीफ़नामा
रज़ा अमरोहवी का नाम उर्दू तनक़ीद (criticism) की दुनिया में इज्ज़त और एतमाद का पैग़ाम है। उन्होंने अपने इल्म और फ़िक्र से कई नस्लों को रौशन किया।
ज़ुल्फ़िकार बाक़र
Urdu Shayar
मजमूआ-ए-शायरी
रज़ा अमरोहवी का नाम उर्दू तनक़ीद (criticism) की दुनिया में इज्ज़त और एतमाद का पैग़ाम है। उन्होंने अपने इल्म और फ़िक्र से कई नस्लों को रौशन किया।